madhusala
मधुशाला बदनाम हो गयी,हर महफ़िल की शान हो गयी
जिव्हा से हल्खो तक गुजरी,कब सुबहो से शाम हो गयी,
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,
नुक्कड़ चौक चौराहों में,गुल से मैं गुलफाम हो गयी
मद,मय,मदिरा,सोमरसों के,नामों से बदनाम हो गयी
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,
मंदिर से मदिरालय तक,कई कहानी आम हो गयी
देव असुर मन्थन से निकली,असुरों की मै जाम हो गयी,
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,
इंसानों शैतानो की शोहबत,में पड़ के बदनाम हो गयी
पिता जलंधर देख मेरी गति,सरे राह बदनाम हो गयी,
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,
अरविन्द भदौरिया,
मेरी रचनाऐ...
मधुशाला,
मधुशाला बदनाम हो गयी,हर महफ़िल की शान हो गयी
जिव्हा से हल्खो तक गुजरी,कब सुबहो से शाम हो गयी,
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,
नुक्कड़ चौक चौराहों में,गुल से मैं गुलफाम हो गयी
मद,मय,मदिरा,सोमरसों के,नामों से बदनाम हो गयी
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,
मंदिर से मदिरालय तक,कई कहानी आम हो गयी
देव असुर मन्थन से निकली,असुरों की मै जाम हो गयी,
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,
इंसानों शैतानो की शोहबत,में पड़ के बदनाम हो गयी
पिता जलंधर देख मेरी गति,सरे राह बदनाम हो गयी,
मधुशाला बदनाम हो गयी,,,
अरविन्द भदौरिया,

इंसानों शैतानो की शोहबत,में पड़ के बदनाम हो गयी
ReplyDeleteपिता जलंधर देख मेरी गति,सरे राह बदनाम हो गयी,
सुंदर बेहतरीन रचना,,,,
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